छत्तीसगढ़

बाघों की तलाश में कैमरे ने कैद की जंगल की ‘सीक्रेट टीम’, उदंती-सीतानदी में दिखे चार ढोल

गरियाबंद | 27 जून बाघों की गिनती के लिए लगाए गए कैमरा ट्रैप ने इस बार ऐसी तस्वीर रिकॉर्ड की, जिसने वन्यजीव विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026 के दौरान उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक साथ चार भारतीय जंगली कुत्तों (ढोल) का झुंड कैमरे में कैद हुआ। इसे केवल एक वन्यजीव रिकॉर्ड नहीं, बल्कि जंगल की बेहतर होती पारिस्थितिकी का मजबूत संकेत माना जा रहा है।ढोल (Cuon alpinus) भारत के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त मांसाहारी जीवों में शामिल हैं। यह प्रजाति IUCN की रेड लिस्ट में Endangered श्रेणी में दर्ज है और भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा प्राप्त है।विशेषज्ञों के अनुसार ढोल तभी किसी जंगल में स्थायी रूप से निवास करते हैं, जब वहां पर्याप्त शिकार, सुरक्षित आवास और संतुलित खाद्य-श्रृंखला मौजूद हो। इसलिए चार ढोलों का एक साथ कैमरे में रिकॉर्ड होना उदंती-सीतानदी के लिए एक सकारात्मक पारिस्थितिक संकेत माना जा रहा है।इस उपलब्धि के पीछे पिछले कुछ वर्षों में किए गए व्यापक संरक्षण अभियान को अहम माना जा रहा है। रिजर्व प्रशासन ने करीब 956 हेक्टेयर अतिक्रमित वन भूमि को पुनर्स्थापित किया, 550 से अधिक वन्यजीव अपराधियों, शिकारियों और तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की तथा एंटी-पोचिंग अभियान, आधुनिक कैमरा ट्रैप निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को मजबूत बनाया।वन अधिकारियों का कहना है कि किसी भी टाइगर रिजर्व की सफलता केवल बाघों की संख्या से नहीं, बल्कि पूरे जैव-विविधता तंत्र से मापी जाती है। ढोल जैसे संवेदनशील मांसाहारी जीवों की वापसी इस बात का प्रमाण है कि उदंती-सीतानदी के जंगल एक बार फिर संतुलित और समृद्ध पारिस्थितिकी की ओर बढ़ रहे हैं।

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